कैसे संतों ने सांप की आत्मा को सही रास्ते लगाया
लिया और वह बोलना शुरू हो गई दोस्तों मैं हैदराबाद में भर्ती देखने गया था वहां पर मैंने एक सांप को पकड़कर मरे हुए
सांप को पकड़कर नाली में फेंक दिया था और उसकी वह आत्मा मेरे पीछे लग गई एक तो यह बात हो गई और भी
और उसका कुछ पता भी नहीं चल रहा था कि यह कौन सी आत्मा है और मैं बहुत डर गया कि यह क्या हो रहा है फिर संतो ने अपनी ध्यान अवस्था लगाई और बताया कि यह कोई एक सांप की आत्मा है फिर वह एकदम जोर से प्रगट हुई और जोर जोर से चिल्लाने लगे और मैं और डर गया फिर संतों ने उस पर सतनाम किया उसने बताया कि इसने मेरे को पकड़कर नाली में फेंक दिया है इसको मेरा पाप लगा है और मैं तभी अपने हंकार में डूबा हुआ था जब मैंने यह काम किया था कि जब मैंने सांप को पकड़कर नाली में फेंका था पर मेरे को इन चीजों के बारे में जानकारी नहीं थी कि ऐसा भी हो सकता है तो सांप की आत्मा 2 दिन तक बोलती रही मेरे शरीर के ऊपर उसके बाद में संतों ने धीरे-धीरे उसको अपने सतनाम के जाप से बस में किया और उसको सही रास्ते पर ले कर आए और फिर उसको मेरे शरीर से अलग किया और उसको सतनाम का जाप दे दिया वह हाथ मा मेरे शरीर को छोड़ दिया और वह चली गई और मेरी हालत में कुछ सुधार हुआ पर वह काफी नहीं था क्योंकि मैं बहुत परेशान था कि मेरे को मालूम नहीं था कि यह क्या बात हो रही है और इस कहानी को मैं अपने दोस्तों और मित्रों के साथ शेयर कर रहा हूं कृपया आप मेरी कहानी को सुनें और आगे मैं अपनी कहानी नेक्स्ट ब्लॉक में बताऊंगा

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें